ashwagandha health benefits

अश्वगंधा जिसके नाम का मतलब है घोड़े जैसी गंध वाला या घोड़े जैसे ताक़त वाली वनस्पति . अश्वगंधा का नाम अश्‍व और गंध से लिया गया है। अश्‍वगंधा की जड़ और पत्तों से घोड़े के मूत्र एवं पसीने जैसी दुर्गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्‍वगंधा रखा गया है। आयुर्वेदिक शोधकर्ताओं का भी मानना है कि अश्‍वगंधा के सेवन से अश्‍व (घोड़े) जैसी ताकत और यौन शक्‍ति मिलती है।आजकल टीवी और विज्ञापन में अक्सर देखते होगे अश्वगंधा के बारेमे .अश्वगंधा एक बहुत ही ताकतवर औषधि है .आयुर्वेद में इसके बहुत सारे नाम दिए गए है .आयुर्वेद में इसे लघु कहा गया है मतलब खाने में हल्का है और गरम प्रकृति की है तो ये वात प्रकृति के लोगो के लिए भी ये बहुत अच्छी है .इसका रस स्वाद मधुर तिक्त कसाय है ,इसका स्वभाव गरम है ये गरम स्वभाव की वनस्पति है

अश्‍वगंधा क्या है? (What is Ashwagandha?)

अलग-अलग देशों में अश्‍वगंधा कई प्रकार की होती है, लेकिन असली अश्वगंधा की पहचान करने के लिए इसके पौधों को मसलने पर घोड़े जैसी गंध आती है। अश्वगंधा की ताजी जड़ में यह गंध अधिक तेज होती है। वन में पाए जाने वाले पौधों की तुलना में खेती के माध्‍यम से उगाए जाने वाले अश्‍वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी होती है। तेल निकालने के लिए वनों में पाया जाने वाला अश्‍वगंधा का पौधा ही अच्‍छा माना जाता है। इसके दो प्रकार हैं-

छोटी असगंध (अश्वगंधा)

इसकी झाड़ी छोटी होने से यह छोटी असगंध कहलाती है, लेकिन इसकी जड़ बड़ी होती है। राजस्‍थान के नागौर में यह बहुत अधिक पाई जाती है और वहां के जलवायु के प्रभाव से यह विशेष प्रभावशाली होती है। इसीलिए इसको नागौरी असगंध भी कहते हैं।

बड़ी या देशी असगंध (अश्वगंधा)

इसकी झाड़ी बड़ी होती है, लेकिन जड़ें छोटी और पतली होती हैं। यह बाग-बगीचों, खेतों और पहाड़ी स्थानों में सामान्य रूप में पाई जाती है। असगंध में कब्‍ज गुणों की प्रधानता होने से और उसकी गंध कुछ घोड़े के पेशाब जैसी होने से संस्कृत में इसकी बाजी या घोड़े से संबंधित नाम रखे गए हैं।  

बाहरी आकृति

बाजार में अश्‍वगंधा की दो प्रजातियां मिलती हैंः-

पहली मूल अश्‍वगंधा Withania somnifera (Linn.) Dunal, जो 0.3-2 मीटर ऊंचा, सीधा, धूसर रंग का घनरोमश तना वाला होता है।

दूसरी काकनज Withania coagulans (Stocks) Duanlजो लगभग 1.2 मीटर तक ऊंचा, झाड़ीदार तना वाला होता है।

अश्‍वगंधा के फायदे (Ashwagandha Benefits and Uses in Hindi)

आयुर्वेद में अश्‍वगंधा का उपयोग अश्वगंधा के पत्‍ते, अश्वगंधा जड़ के चूर्ण के रुप में किया जाता है। अश्वगंधा के फायदे जितने अनगिनत हैं उतने ही अश्वगंधा के नुकसान भी है चिकित्सक के बिना सलाह के सेवन करने से शारीरिक अवस्था खराब हो सकती है। ये औषधि बहुत गरम होती है इसका उपयोग थोडी कम मात्र में ही करना उचित है .अश्‍वगंधा के कुछ खास औषधीय गुणों के कारण यह बहुत तेजी से प्रचलित हुआ है। आइए आपको बताते हैं आप अश्वगंधा का प्रयोग किन-किन बीमारियों में और कैसे कर सकते हैंः कई रोगों में आश्‍चर्यजनक रूप से लाभकारी अश्वगंधा का औषधीय इस्तेमाल करना चाहिए, चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

अश्वगंधा रोग प्रतिरोधक छमता के लिए(to increase imunity )

शरीर के लिए इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होना बहुत जरुरी होता है। अश्वगंधा में ऐसे गुण होते है। जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाने का काम करते है। जिससे सर्दी-खांसी की समस्या जल्दी नहीं होती है। अश्वगंधा शारीर की सभी धातुवों को पोषण देती है इसलिए ये शारीर को स्वस्थ रखने का काम करती और इमुनिटी को बढ़ाती है .

सफेद बाल की समस्या में अश्वगंधा के फायदे (Use Ashwagandha Powder to Stop Gray Hair Problem in Hindi)

अश्वगंधा के सेवन से सफ़ेद बाल की समस्या में भी आराम मिलता है ।2-4 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करें। अश्वगंधा के फायदे के वजह से समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या ठीक होती है।

आंखों की ज्‍योति बढ़ाए अश्‍वगंधा  (Ashwagandha Benefits in Increasing Eyesight

आंखो के लिए अश्वगंधा बहुत अधिक लाभदायक होता है। 2 ग्राम अश्‍वगंधा, 2 ग्राम आंवला (धात्री फल) और 1 ग्राम मुलेठी को मिलाकर, पीसकर अश्वगंधा चूर्ण तैयार कर लें। एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है। अश्वगंधा के फायदे के कारण आँखों को आराम मिलता है।वैज्ञानिको ने अपने शोध में बताया है अश्वगंधा में मोतियाबिंद रोग से लड़ने की शक्ति होती है। अपने चिकिस्तक से परामर्श जरूर करें।2 ग्राम अश्‍वगंधा, 2 ग्राम आंवला (धात्री फल) और 1 ग्राम मुलेठी को आपस में मिलाकर, पीसकर अश्वगंधा चूर्ण कर लें। एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है।

गले के रोग (गलगंड) में अश्वगंधा के पत्ते के फायदे (Ashwagandha Uses to Cure Goiter)

गले के रोग में भी अश्वगंधा बहुत फायदेमंद सिद्ध होता है।इसके औषधीय गुणों के वजह से अश्वगंधा गले के रोग में लाभकारी सिद्ध होता है।

अश्‍वगंधा पाउडर तथा पुराने गुड़ को बराबार मात्रा में मिलाकर 1/2-1 ग्राम की वटी बना लें। इसे सुबह-सुबह बासी जल के साथ सेवन करें। अश्‍वगंधा के पत्‍ते का पेस्‍ट तैयार करें। इसका गण्डमाला पर लेप करें। इससे गलगंड में लाभ होता है।

टीबी रोग में अश्वगंधा चूर्ण के लाभ (Ashwagandha Benefits in Tuberculosis (T.B.) Treatment )

अश्‍वगंधा चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा को अश्वगंधा के ही 20 मिलीग्राम काढ़े के साथ सेवन करें। इससे टीबी में फायदा होता है। अश्‍वगंधा की जड़ से चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 2 ग्राम लें और इसमें 1 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 ग्राम घी और 5 ग्राम शहद मिला लें। इसका सेवन करने से टीबी (क्षय रोग) में लाभ होता है।

अश्वगंधा के इस्तेमाल से खांसी का इलाज (Ashwagandha Uses in Cough and cold)

अश्वगंधा कफ को कम करने वाली है जिनको खासी अस्थमा है या कफ बहुत जमा है तो इसका सेवन कर सकते है ,अस्वगंधा को भूनकर उसकी जो राख बनती है उसका सेवन करने के लिए बताया है। इसमें आप अश्वगंधा का घी और शहद के साथ सेवन कर सकते है ,या शहद के साथ भी ले सकते है ।अश्वगंधा की राख में शहद मिलाकर ले सकते है शहद कफ को निकालने वाला है

अश्वगंधा की 10 ग्राम जड़ों को कूट लें। इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 मिलीग्राम पानी में पकाएं। जब इसका आठवां हिस्सा रह जाए तो आंच बंद कर दें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होता है।

अश्वगंधा के पत्तों से तैयार 40 मिलीग्राम गाढ़ा काढ़ा लें। इसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 10 ग्राम कत्था चूर्ण, 5 ग्राम काली मिर्च तथा ढाई ग्राम सैंधा नमक मिला लें। इसकी 500 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इन गोलियों को चूसने से हर तरह की खांसी दूर होती है। टीबी के कारण से होने वाली खांसी में भी यह विशेष लाभदायक है।

सीने के दर्द में अश्वगंधा के लाभ (Ashwagandha Powder for Chest Pain relief)

अश्वगंधा कफ रोग में बहुत फायदेमंद होती अगर छाती में दर्द हो तो अश्वगंधा की जड़ का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा का जल के साथ सेवन करें। इससे सीने के दर्द में लाभ होता है।

पेट की बीमारी में अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग (Ashwagandha Churna benefits in Abdominal or Intestinal Worms)

अश्वगंधा चूर्ण के फायदे (ashwagandha benefit) आप पेट के रोग में भी ले सकते हैं। पेट में किसी तरह के कीड़े हो बार बार दवाईया खा रहे हो फिर भी ठीक नही हो रहा तो अश्वगंधा आपके लिए श्रेष्ठ है . पेट की बीमारी में आप अश्वगंधा चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं। अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर मात्रा में बहेड़ा चूर्ण मिला लें। इसे 2-4 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म  होते हैं।  जिनको क्रीमी है जिससे पेट में दर्द है तो ये सभी लोग अस्वगंधा का सेवन कर सकते है

अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर भाग में गिलोय का चूर्ण मिला लें। इसे 5-10 ग्राम शहद के साथ नियमित सेवन करें। इससे पेट के कीड़ों की समस्या दूर होती है ।  

अश्वगंधा चूर्ण या अश्वगंधा पाउडर की 2 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कब्‍ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

गर्भधारण करने में अश्‍वगंधा के प्रयोग से लाभ (Ashwagandha Churna Helps in Pregnancy Problem in Hindi)

  • 20 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को एक लीटर पानी तथा 250 मिलीग्राम गाय के दूध में मिला लें। इसे धीमी आंच पर पकाएं। जब इसमें केवल दूध बचा रह जाय तब इसमें 6 ग्राम मिश्री और 6 ग्राम गाय का घी मिला लें। इस व्‍यंजन का मासिक धर्म के शुद्धिस्नान के तीन दिन बाद, तीन दिन तक सेवन करने से यह गर्भधारण में सहायक होता है।
  • अश्वगंधा और सफेद कटेरी की जड़ लें। इन दोनों के 10-10 मिलीग्राम रस का पहले महीने से पांच महीने तक की गर्भवती स्त्रियों को सेवन करने से अकाल में गर्भपात नहीं होता है।
  • वो औरतें जिनका गर्भाशय निचे खिशक रहा हो उसमे अश्वगंधा फायदेमंद है अश्वागंदा गर्भाशय को ताक़त देने का काम करती है.
  • अश्वगंधा गर्भाशय की मांसपेसियों को बल देती है वो औरतें जिनको गर्भधारण में परेसानी आ रही है गर्भ नही ठहर रहा उनके लिए लाभकारी है अश्वगंधा.

ल्यूकोरिया के इलाज में अश्‍वगंधा से फायदा (Ashwagandha Root Benefits in Leukorrhea )

आश्वागंधा महिलाओं से जुडी समस्या में भी बहुत फायदेमंद है महिलाओ को बल प्रदान करने में खाशकर जब एबॉर्शन के बाद गर्भाशय में कमजोरी होती उस समय बहुत फायदेमंद है और लुकोरिया जैसे समस्या में भी लाभप्रद है 2-4 ग्राम असगंधा की जड़ के चूर्ण में मिश्री मिला लें। इसे गाय के दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

अश्‍वगंधा, तिल, उड़द, गुड़ तथा घी को समान मात्रा में लें। इसे लड्डू बनाकर खिलाने से भी ल्यूकोरिया में फायदा होता है।

अश्वगंधा का गुम गठिया के इलाज के लिए फायदेमंद (Ashwagandha Benefits in Arthritis)

  • अश्वगंधा किसी भी कफ और वात के रोग को दूर करने में सहायक होता है .इसकी प्रकृति गरम होती है इसलिए ये गठिया जैसे रोग में बहुत फायदेमंद होता है 2 ग्राम अश्वगंधा पाउडर को सुबह और शाम गर्म दूध या पानी या फिर गाय के घी या शक्‍कर के साथ खाने से गठिया में फायदा होता है।
  • इससे कमर दर्द और नींद न आने की समस्या में भी लाभ होता है।
  • अश्वगंधा के 30 ग्राम ताजा पत्तों को, 250 मिलीग्राम पानी में उबाल कर काढ़ा आधा रह जाए तो छानकर सेवन करें । एक सप्ताह तक सेवन करने से कफ से होने वाले वात तथा गठिया रोग में बहुत लाभ होता है। इसका लेप भी लाभदायक है।

चोट लगने पर करें अश्‍वगंधा का उपयोग (Uses of Ashwagandha in Injury)

अश्वगंधा पाउडर में गुड़ या घी मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करने से शस्‍त्र के चोट से होने वाले दर्द में आराम मिलता है।

अश्‍वगंधा का प्रयोग त्‍वचा रोग में फायदेमंद (Benefits of Ashwagandha in Skin Diseases )

अश्‍वगंधा के पत्‍तों का पेस्‍ट बना लें। इसका लेप या पत्‍तों के रस से धोने से त्वचा में लगने वाले कीड़े ठीक होते है। इससे मधुमेह से होने वाले घाव तथा अन्‍य प्रकार के घावों का इलाज होता है। यह सूजन को दूर करने में लाभप्रद होता है।

अश्‍वगंधा की जड़ को पीसकर, गुनगुना करके लेप करने से विसर्प रोग की समस्‍या में लाभ होता है।त्वचा सम्बंधित समस्याओं को दूर करने लिए अश्वगंधा का उपयोग अधिक फायदेमंद रहता है। यह त्वचा में कोलेजन को बढ़ाता है। जिससे त्वचा निखर आ जाता है । रूखी त्वचा नहीं होती है।

अश्वगंधा के सेवन से दूर होती है शारीरिक कमजोरी (Ashwagandha Uses for Weakness )

अश्वगंधा शारीर की सभी धतुओं को पोषण देने का काम करता है रस रक्त मांस मज्जा अगर सभी धतुवों को एक साथ पोषण देना हो तो अश्वगंधा सर्वश्रेष्ठ रसायन है ,ये शरिरिक कमजोरी को दूर करती है ,शारीर को बल प्रदान करती है .इसलिए जिम जाने वाले लोग जिनको बॉडी बिल्डिंग करनी है उनलोगों को अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए

  • 2-4 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण को एक वर्ष तक बताई गई विधि से सेवन करने से शरीर रोग मुक्‍त तथा बलवान हो जाता है।
  • ये मांस धातु को भी बढाती है जो लोग बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करते है जिनको जिम जाना है जिनको मसल्स को बढ़ाना है तो उनके लिए भी अश्वगंधा बहुत औषधि है यह एक रासायन है.टॉनिक की तरह ये सह्रीर को बलवान बनाती है
  • 10-10 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण, तिल व घी लें। इसमें तीन ग्राम शहद मिलाकर जाड़े के दिनों में रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है।
  • 6 ग्राम असगंधा चूर्ण में उतने ही भाग मिश्री और शहद मिला लें। इसमें 10 ग्राम गाय का घी मिलाएं। इस मिश्रण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम ठंडी के मौसम में 4 महीने तक सेवन करने से शरीर का पोषण होता है।
  • 3 ग्राम असगंधा मूल चूर्ण को पित्त प्रकृति वाला व्‍यक्ति ताजे दूध (कच्चा/धारोष्ण) के साथ सेवन करें। वात प्रकृति वाला शुद्ध तिल के साथ सेवन करें और कफ प्रकृति का व्‍यक्ति गुनगुने जल के साथ एक साल तक सेवन करें। इससे शारीरिक कमोजरी दूर होती है और सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • 20 ग्राम असगंधा चूर्ण, तिल 40 ग्राम और उड़द 160 ग्राम लें। इन तीनों को महीन पीसकर इसके बड़े बनाकर ताजे-ताजे एक महीने तक सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।
  • असगंधा की जड़ और चिरायता को बराबर भाग में लेकर अच्‍छी तरह से कूट कर मिला लें। इस चूर्ण को 2-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।
  • अश्एवगंधा शुक्र धातु को पोषण देने का काम करती है . एक ग्राम असगंधा चूर्ण में 125 मिग्रा मिश्री डालकर, गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से वीर्य विकार दूर होकर वीर्य मजबूत होता है तथा बल बढ़ता है।

रक्त सुद्धि में अश्वगंधा फायदेमंद (Benefits of Ashwagandha in Blood)

अश्वगंधा रक्त्सुद्धि का काम करता है रक्त में वायु विकार आने पर रक्त का रंग गहरा होना काला होना रक्त में खून के थक्के बनना और रक्त में बबल बनना ये सब वायु विकार के लछन है .अश्वगंधा में रक्त विकार को ठीक करने के गुन पाए जाते है . अश्वगंधा पाउडर में बराबर मात्रा में चोपचीनी चूर्ण या चिरायता का चूर्ण मिला लें। इसे 3-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से खून में होने वाली समस्‍याएं ठीक होती हैं।  

बुखार में करें अश्‍वगंधा का प्रयोग (Uses of Ashwagandha in fever)

अश्वगंधा बुखार में भी बहुत फायदेमंद होता है .2 ग्राम अश्‍वगंधा चूर्ण और 1 ग्राम गिलोय जूस (सत्) को मिला लें। इसे हर दिन शाम को गुनगुने पानी या शहद के साथ खाने से पुराना बुखार ठीक होता है।

इंद्रिय दुर्बलता दूर करता ,शुक्र धातु को पोषण देता है अश्‍वगंधा का प्रयोग

अश्वगंधा शुक्र धातु को पोषण देता है. अश्वगंधा स्पर्म काउंट को भी बढ़ाती है.अश्वगंधा के चूर्ण को कपड़े से छान कर (कपड़छन चूर्ण) उसमें उतनी ही मात्रा में खांड मिलाकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह में भोजन से तीन घंटे पहले सेवन करें।

चोट लगने पर करें अश्‍वगंधा का सेवन (Uses of Ashwagandha in Injury in Hindi)

अश्वगंधा पाउडर में गुड़ या घी मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करने से शस्‍त्र के चोट से होने वाले दर्द में आराम मिलता है

नींद लाने में सहायक

ये नींद भी लाती है और मानसिक रूप से भी बैलेंस रखती है.अश्वगंधा के सेवन से नींद अच्छी आती है .मस्तिष्क को बैलेंस रखता है

सुजन (sweling)कम करता है

शरीर से सुजन कम करना है तो अश्वगंधा बहुत अच्छी औषधि है .

स्वाश की बिमारी में फायदेमंद

स्वास की बिमारियों में बहुत फायदेमंद है जो भी अस्थमेटिक है उसके लिए भी अश्वगंधा फायदेमंद है . अश्वगंधा की राख में शहद और घी के साथ सेवेन किया जाय तो बहुत लाभप्रद है .जिनको सांस लेने में दिक्कत होती है उनके लिए भी अच्छी है

वात दोष और कफ दोष

अश्वगंधा वात दोष और कफ दोष दोनों को कम करती है जिनके शारीर में वात और कफ दोष बढ़ा हो उनके लिए अश्वगंधा बहुत अच्छी औषधि है.वाट पिटा के सभी तरोगों में अश्वगंधा फायदेमंद है .

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी में लाभप्रद

जिनको किसी बीमारी के कारण मांस छय या स्कुलर डिस्ट्रॉफी है उसमे भी बहुत लाभप्रद औषधि है. अश्वगंधा बल प्रदान करती है मांस मज्जा बनाने में मदद करती है . शारीर के सभी धतुवों को पोषण देती है . जिनको मसल्स नसों से सम्बन्धी बीमारी है वो सभी अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं .

दीपन भूख लगना जठर अग्नि को बढ़ाती है .

ये दीपन करती है मतलब भूख लगने के लिए जथर अग्नि को बढाती है .वातानुलोमन करने वाली है वाट को नोर्मल गति को बनाये रखने वाली है इस तरह से जिनको भूख नही लगती पेट में गैस होता हैऊ उनके लिए अश्वगंधा फायदेमंद है

अस्वगंधा रस और रक्त धातु पर क्या काम करती ही

अश्वगंधा खून साफ़ करने वाली है तो त्वचा की सुन्दरता को बनाये रखने वाली है स्किन से जुडी बीमारियों को दूर करती है सफ़ेद दाग में भी मदद करती है जिनको ब्लड प्रेशर की परेसानी है वो अस्वगंधा का सेवन कर सकते है .

बालो के लिए

बालो की गिरती समस्या को दूर करने के लिए अश्वगंधा बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी मानी जाती है। यह मेलेनिन की हानि से बालो को बचाता है। बालो की जड़ो को मजबूत करता है। बालो की गिरने की समस्या कम हो जाती है।

थायराइड के लिए

 थायराइड में अश्वगंधा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करने में फायदेमंद रहता है।

तनाव दूर करने में

 व्यक्ति हमेशा किसी ना किसी  बात को लेकर तनाव में घिरा हुआ रहता है। तनाव को दूर करने के लिए अश्वगंधा बहुत फायदेमंद रहता है। इसका चूर्ण का सेवन करना चाहिए वो भी चिकिस्तक की सलाह के बाद।

हृदय के लिए :- 

अश्वगंधा में कई तरह एंटीऑक्सीडेंट होते है। जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। जिससे हृदय का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। हृदय में विकार होने की संभावना कम हो जाती है।

कैंसर में

 कैंसर एक तरह की खतरनाक बीमारी होती है। अश्वगंधा में ऐसे औषधीय गुण होते है। जो ट्यूमर को बनने से रोकते है। शरीर को कैंसर रोग से बचाने में सहायता करता है

नोट

पर ये गरम औषधि है इसलिए प्रकृति पित्त प्रकृति है जिनको पित्त के बढने का कारण शरीर में जलन हो रही हो तो उनको इसका सेवन संभाल के करना चाहिए .यहाँ तक की गर्मी के मौसम में जो पित्त बढने की ऋतू है उसमे अस्वगंधा का सेवन संभाल कर करना चाहिए या फिर पित्त शमन करने वाली औषधि के साथ करना चाहिए

इस्तेमाल के लिए अश्‍वगंधा के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Ashwagandha)

  • पत्‍ते
  • जड़
  • फल
  • बीज

अश्वगंधा से जुड़ी विशेष जानकारी – बाजारों में जो असगंधा बिकती है उसमें काकनज की जड़े मिली हुई होती हैं। कुछ लोग इसे देशी असगंध भी कहते हैं। काकनज की जड़ें असगंधा से कम गुण वाली होती हैं। जंगली अश्‍वगंधा का बाहरी प्रयोग ज्यादा होता है।

अश्वगंधा का सेवन कैसे करें (How Much to Consume Ashwagandha)

अश्वगंधा का सही लाभ पाने के लिए अश्वगंधा का सेवन कैसे करें ये पता होना ज़रूरी होता है। अश्वगंधा के सही फायदा पाने और नुकसान से बचने के लिए चिकित्सक के परामर्श के अनुसार सेवन करना चाहिए-

  • जड़ का चूर्ण – 2-4 ग्राम
  • काढ़ा – 10-30 मिलीग्राम

अश्वगंधा से नुकसान (Ashwagandha Side Effects)

गर्म प्रकृति वाले व्‍यक्ति के लिए अश्‍वगंधा का प्रयोग नुकसानदेह होता है।

अश्‍वगंधा के नुकसानदेह प्रभाव को गोंद, कतीरा एवं घी के सेवन से ठीक किया जाता है।

अनेक भाषाओं में अश्‍वगंधा के नाम (Ashwagandha Called in Different Languages)

अश्‍वगंधा का का वानस्पतिक नाम (Botanical name) Withania somnifera (L.) Dunal (विथेनिआ सॉम्नीफेरा) Syn-Physalis somnifera Linn. है और इसके अन्य नाम ये हैंः-

Ashwagandha in:-

  • Hindi (ashwagandha in hindi) – असगन्ध, अश्वगन्धा, पुनीर, नागोरी असगन्ध
  • English – Winter cherry  (विंटर चेरी), पॉयजनस गूज्बेर्री (Poisonous gooseberry)  
  • Sanskrit – वराहकर्णी, वरदा, बलदा, कुष्ठगन्धिनी, अश्वगंधा
  • Oriya – असुंध (Asugandha)
  • Punjabi – असगंद (Asgand)
  • Malyalam – अमुक्कुरम (Amukkuram)
  • Tamil – चुवदिग (Chuvdig), अमुक्किरा (Amukkira), अम्कुंग (Amkulang)
  • Telugu – पैन्नेरुगड्डु (Panerugaddu), आंड्रा (Andra), अश्वगन्धी (Ashwagandhi)
  • Bengali – अश्वगन्धा (Ashwagandha)
  • Nepali – अश्वगन्धा (Ashwagandha)
  • Urdu – असगंधनागोरी (Asgandanagori)
  • Kannada – अमनगुरा (Amangura), विरेमङड्लनागड्डी (Viremaddlnagaddi)
  • Gujarati – आसन्ध (Aasandh), घोडासोडा (Ghodasoda), असोड़ा (Asoda)
  • Marathi (ashwagandha in marathi) – असकन्धा (Askandha), टिल्लि (Tilli)
  • Arabic – तुख्मे हयात (Tukhme hayat), काकनजे हिन्दी (Kaknaje hindi)
  • Farasi – मेहरनानबरारी (Mehernanbarari), असगंध-ए-नागौरी (Ashgandh-e-nagori)

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