Kaph dosh prakriti

मनुष्य का स्वभाव उसके शरीर की आकृति एवं उसके गुण आदि का स्वाभाविक रूप से जो निर्माण होता है, सामान्यतः उसे ही प्रकृति कहा जाता है ।।आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की अपनी अलग-अलग प्रकृति होती है आयुर्वेद के अनुसार प्रकृति तीन प्रकार के होते हैं वात प्रकृति पित्त प्रकृति और कफ प्रकृति आज के इस लेख में हम कफ प्रकृति के बारे में बताएंगे कफ प्रकृति के व्यक्तियों के क्या लक्षण होते हैं कैसे पहचानेंगे कि वह कफ प्रकृति के हैं या किसी और प्रकृति के उनकी क्या क्या समस्या होती है और उसका क्या समाधान है .आयुर्वेद में कफ वालों के लिए ये श्लोक है …….

“गंभीर बुद्धि स्थूल अंग स्निग्ध केशो महाबलः ।
स्वप्ने जलाशय लोकी कफप्रकृतिको नरः।।”

इसका तात्पर्य है कफ वाले गम्भीर स्वभाव के होते है मोटापा स्वस्थ अच्छी शारीर वाले होते है घने काले बाल ताकतवर होते सपने मे पानी को देखने वाले होते हैं .

शारीरिक बनावट मानसिक लच्छण

  • प्रकृति के लोगों का शारीरिक बनावट बड़ा बड़ा होता है उनकी आंखें बड़ी होंगे हाथ पैर बड़े होंगे माथा चौडा बड़ा होगा। गाल भरे हुए फूले हुए होंगे सीना चौड़ा होगा इस तरह से उनका शारीरिक बनावट थोड़ा मोटा और बड़ा होता है।कफ प्रकृति के लोगो की शारीरिक बनावट बहुत अच्छी होती है । कफ प्रकृति के व्‍यक्ति का वजन अधिक होता है, ज्‍यादातर लोग मोटे होते हैं । कफ वालो को शरीर बहुत मजबूत होता है ।क्योकि कफ दो चीजों से बनता है पांच महाभूत में से जो दो चीजें है जल और पृथ्वी इन दो चीजों का मिश्रण होता है ।
  • इनकी शारीरिक ताक़त बहुत होती है कितना भी काम कर ले थकते नही है उनको जल्दी पसीना नही आता है। उनका हाथ पैर बहुत मजबूत होता है ।ये काम धीरे धीरे करते है और लंबे समय तक करते है ।उनके हाँथ पैर और जॉइंट बहुत अच्छे अलग अलग डिवाइडेड मिलेंगे. ।
  • कफ प्रकृति के लोग अपना काम बहुत धीरे-धीरे करते हैं उनका सारा काम धीरे-धीरे होता है जैसे किसी से बात करते हैं धीरे-धीरे आराम से बात करेंगे ।कोई काम करेंगे तो बहुत धीरे धीरे काम करेंगे ।खाना खाएंगे बहुत धीरे-धीरे किसी काम को बहुत ही आराम से सोच कर करेंगे वात प्रकृति वाले इसके उल्टा होते हैं सारा काम जल्दी जल्दी करते हैं।.कफ प्रकृति वालों के काम मे स्थिरता होती है ।
  • कफ प्रकृति के बाल बहुत अच्छे और घने होते है ।कफ प्रकृति वालों को जन्म से ही बहुत घने बाल होते ही उनलके सिर पर और सीने पर भी बहुत बाल होते है ।कफ प्रकृति वालों के बाल बहुत होते है ।पूरे शरीर मे उनके बाल ज्यादा होते हैं। बालों का रंग भूरा होता है. इनके बाल ऑयली है
  • कफ प्रकृति वालों की आवाज में भारीपन होगा ।सुनने में उनकी आवाज भारी होगी और मिठास लिए होगी ।मतलब उनकी आवाज सुनने में मधुर होगी।कफ प्रकृति की आवाज मधुर होती है जिसकी कि वजह से ही घोषणा करने का काम भी करते है
  • कफ वालों का प्राकृतिक रंग सफेद या फिर गोरा होता है ऐसे लाेगों की त्‍वचा तैलीय होती है .
  • कफ वालों को ठंड़ी ज्याद लगती है .
  • ऐसे लोग जिन्होंने एक बार खाना खा लिया सीधा 8 -10 घण्टे बाद खाना चाहिए होता है . ऐसे लोग कफ प्रकृति के होते है ।इनका खान पान कम होता ही इनकी अग्नि मंद होती है इसलिए खान पान कम मात्रा में करते है .
  • कफ प्रकृति वाले सोते बहुत है ।ऐसे लोग जो ऊंघते रहते है हमेसा जम्हाई लेते रहते है जिनकी नींद लम्बी होती है वो कफ प्रकृति के होते है ।जैसे बच्चे कफ प्रकृति के होते है इसलिए वो बहुत सोते है .
  • महिलाओ में कफ प्रकृति ऐसे महिलाएं जिनका शरीर जन्म से ही भारी है वजन ज्यादा होता है।कफ वालों की हड्डियां मोटी होती है शरीर स्ट्रांग होता है ।ऐसे महिलाएं जिनका मासिक धर्म या तो टाइम आए आएगा या देर से आएगा या मासिक धर्म के समय ज्यादा पीड़ा नही होगी जिनको सफेद पानी की समस्या ज्यादा होती है ऐसे महिलाएं कफ प्रकृति के अंदर आती है।
  • सपने मे पानी को देखने वाला 
  • कफ वाले गम्भीर स्वभाव के होते है. ज्यादा चंचल प्रकृति के नही होते कफ प्रकृति के लोग .ये लोग बेफ्रिक स्‍वभाव के होते हैं किसी बात की ज्‍यादा चिंता नहीं करते ।कफ वालो को किसी चीज में जल्दबाजी नही होती है
  • उनको किसी बात की चिंता बहुत नही होती है वो ज्यादा टेंसन नही लेते हैं खुद की दुनिया में ही व्यस्त रहते हैं
  • आलस्‍य स्‍वभाव भी कफ प्रकृति का सूचक है 
  • ऐसे लाेगों को जल्‍दी गुस्‍सा नहीं आता ज्‍यादतर शांत स्‍वभाव के होते हैं । 
  • किसी बात को देर में समझते हैं, आसानी से बात समझ में नहीं आती ।
  • कफ वाले स्वछता पसंद होते है .कफ वालों के लच्चन सधुवो के लच्चन से मिलते है इसलिए कफ वालों को आर्य कहा गया है .
  • कफ प्रकृति वाले दृढ संकल्प वाले होते है इसलिए रिलेशनशिप में कफ वाले लोग बहुत अच्छे होते है
  • कफ वाले लोग स्लो होते है हर काम धीरे धीरे करते है .कफ प्रकृति वालों को कोई भी चीज बहुत देर से समझ आती है पर एक बार समझ जाते है तो वो चीज वो लम्बे समय तक याद रखते है .
  • कफ वालों की याददास्त बहुत अच्छी होती है वो लम्बे समय तक कोई बात याद रखते है उनका ज्ञान बहुत अच्छा होता है .
  • कलेश हो किसी तरह का लड़ाई झगड़ा को सहन करने की झेलने की ताक़त कफ प्रकृति के अन्दर होती है.
  • कफ प्रकृति के अंदर लालच नही होगा उनके अन्दर बहुत संयम होता है.
  • कफ वाले धीमे बोलने वाले होते है.कफ वाले लज्जवाले होते है ऐसे लोग जो सब कुछ करके भी क्रेडिट नहीं लेते . कफ वाले दान करते हैं कफ वाले जब दान देते है तो ये देखते हैं की उनको मदद की वास्तव में जरूरत है या नही किसी को भी दान नही देते हैं वो .

उपरोक्‍त लक्षणों के आधार पर हम अपने शरीर की प्रकृति तय कर सकते हैं । हमारे शरीरक की प्रकृति जन्‍म से निर्धारित हो जाता है .किन्‍तु आयु के अनुसार शरीर में भिन्‍न-भिन्‍न दोष दिखाई देते हैं ।आमतौर पर यह देखा गया है कि जन्‍म से 14 वर्ष तक आयु में कफ प्रधान, 14 वर्ष से 45 वर्ष की आयु में पित्‍त प्रधान एवं इसके बाद वात प्रधान हो जाता है ।यही कारण है बचपन में कफ जनित रोग बुखर, खॉंसी, जुकाम ज्‍यादा होता है और बुढ़ापे में वात जनित रोग जोड़ो में दर्द, नींद कम आना देखा जाता है ।

  • कफवर्धक-दूध, मलाई, चावल, पनीर, केला, कुल्‍फी तथा तले हुये पदार्थ ।
  • कफशमनकारी-गुड, मेथी, शहद, अदरक, सोठ, हल्‍दी, सौफ, गौमूत्र, लहसून

अपनी प्रकृति को पहचान कर उसको संतुलित करने वाले आहार विहार का अभ्यास करें ।

कफ प्रकृति समस्या समाधान

तिन विशेष रस जिसका प्रयोग कफ वालों को करना चाहिए १ कडवा रस कसैला

  • कफ वाले जितनी कडवी चीजों का उपयोग करेगे उतना अच्छा होगा जैसे करेला मेथी गिलोय आदि .
  • सभी तरह के गरम मसाले भी बहुत फायदेमंद होते है कफ प्रकृति वालों के लिए जैसे सोंठ काली मिर्च कफ को बाहर निकालने में मदद करती है .तो कफ वालों के लिए गरम मसालों का सेवन थोड़ी सी ज्यादा मात्रा में करें तो उनके लिए फायदेमंद है
  • इन गर्म मसालों के साथ अगर आप सहद का उपयोग करेगे तो वो अमृत की तरह काम करेगा कफ के लिए शहद सबसे अच्छी दवा है .पुराना शहद हो तो बहुत अच्छा है
  • कफ वालो की समस्या ये है की उनको बहुत आलस आता है इसलिए आयुर्वेद में कहा गया है सुख के लिए सुख का त्याग करे .और सुख का त्याग कैसे कर सकते है वो है व्यायाम शारीरिक श्रम .कफ वालो को व्यायाम करना चाहिए व्ययाम्म से आलास खत्म होगा .और कफ प्रकृति वालो को मोटापे की समस्या बहुत होती है इसलिए व्यायाम करने से आपका मोटापा भी कम होगा है कफ वालो के अन्दर फैट बहुत ज्यादा मात्र में होती है .
  • उबटन करना कफ वालो को उबटन करना चाहिए .उबटन करने से चर्बी कम होती है उबटन करने से चर्बी कम होती कफ की समस्या भी दूर होगी
  • पंचकर्म करना .विधिपूर्वक पञ्च कर्म करना चाहिए .
  • रुखी जितनी भी चीजें है वो कफ वालों के लिए बहुत अच्छा है सूखी हुई जो भी चीजें है वो कफ वालों के लिए बहुत अच्छी हैं जैसे जौ .जौ भी कफ वालों के लिए बहुत अच्छा है भेल भी बहुत अच्छा है उसमे लगभग सभी चीजें भुनी हुई होती है.
  • तीखा कडवा कसैला ये कफ वलो के लिए बहुत अच्छा होता है
  • मद्द्य भी बहुत अच्छा है कफ वालों के लिए है परन्तु कम मात्र में और पुरानि मद्य जो आयुर्वेदिक विधि से बनाई जाती है न की वो जो केमिकल रिएक्शन से बनाई जाती है.
  • और भी सुरछित चीजें चाहते है तो आयुर्वेदिक आसव अरिष्ट का सेवन कर सकते है
  • सेक्सुअली एक्टिव होना कफ वालों के लिए भुत अच्छी है मथुन करना हमारे शारीर में वाट और पित्त बढाती है.और मैथुन करने में बहुत ज्यादा एनर्जी जाती है जो कफ वालों के लिए अच्छा है .
  • रात्रि जागरण करना रात को जागने से वात पित्त बढ़ता है और कफ का हानि होता है
  • कफ वालों को कहा जाता है की उनको टेंशन लेना चाहिए टेंशन लेने से हमारे शारीर में वात और पित्त बढ़ता है कफ कम होता है .
  • दालों का पानी या फिर जौ बार्ली इनका पानी उबालकर पीना ये सब कफ के लियें बहुत अच्छा है कफ के लिए .
  • उपवास करना कफ के लिए बहुत जरूरी है कफ वालों की अग्नि मंद होती है .तो कफ वालो के लिये अच्छा है
  • चिकनाहट से थोडा बच कर रहना चाहिए कफ वालों के लिए .

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